वक़्त ने छोड़ा न इक हाथ भी इन हाथों में ज़िन्दगी तुझ को गुज़ारूँ तो गुज़ारूँ कैसे
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
Nida Fazli
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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ज़रा से शक पे हुआ ख़त्म राब्ता लेकिन ज़रा सा शक न हुआ ख़त्म दरमियाँ से मगर
Mohit Subran
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ज़रा सा चूक गया मैं तुझे समझने में वगरना ज़ीस्त तिरी धज्जियाँ उड़ाता मैं
Mohit Subran
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यूँँ पाँव पाँव चला उम्र भर मगर देखो चला जहाँ से था मैं लौट के वहीं पहुँचा नहीं ये बात नहीं तय सफ़र किया ही नहीं रहा सफ़र में ही फिर भी कहीं नहीं पहुँचा
Mohit Subran
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ये उदासी भरी इक रात भला कुछ भी नहीं हम ने वो दिन भी हैं काटे कि जो काटे न गए
Mohit Subran
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वो शोर हो रोने का कि हो शोर हँसी का फिर शोर वो कैसा भी हो बर्दाश्त नहीं है
Mohit Subran
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