आँखों से है समझ न आना फिर होंठों से क्या समझाना सुख-दुख तो हैं सखा तुम्हारे सो इनसे अब क्या घबराना हारा-जीता क्षणिक है प्यारे गिरना उठना क्या शर्माना
Related Sher
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
164 likes
कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
163 likes
यूँँ जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या
Jaun Elia
164 likes
तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
1279 likes
More from DEVANSH TIWARI
मुझ में बस एक ही ख़राबी है मैं ज़बाँ-ओ-दिमाग़ रखता हूँ
DEVANSH TIWARI
0 likes
वो मुझे पूछते हैं गाँव में क्या रक्खा है मैं उन्हें कहता हूँ सब मेरे बड़े रहते हैं
DEVANSH TIWARI
0 likes
किसी जगह पर कहीं जहाँ में किसी दिवस मैं तुम्हें दिखूँ तो सुनो न जानाँ पलट न जाना क़रीब आना गले लगाना
DEVANSH TIWARI
3 likes
फूल की ख़ुशबू बदन चुराए बैठे हैं लोग हमारी रोटी खाए बैठे हैं कौन कहेगा कौन सुनेगा अब मेरी मसनद पर सब बिके बिकाए बैठे हैं
DEVANSH TIWARI
3 likes
एक परिंदे ने जबसे दो प्यारी बातें बोली हैं दिल में कितने दीप जले हैं आँखों में रंगोली है
DEVANSH TIWARI
2 likes
Similar Writers
Our suggestions based on DEVANSH TIWARI.
Similar Moods
More moods that pair well with DEVANSH TIWARI's sher.







