आँखों से ये कहना है बरसातें अब बंद करो
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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इतना ऊँचा उड़ना भी कुछ ठीक नहीं पाबंदी लग जाती है परवाज़ों पर तुझ को छू कर और किसी की चाह रखे हैरत है और लानत है ऐसे हाथों पर
Varun Anand
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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
Tehzeeb Hafi
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महशर का दिन आया है अब तो कर्मा बोलेगा
Shivangi Shivi
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तन्हाई सी शा में हैं ख़ामोशी दे जाती हैं
Shivangi Shivi
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नाम तुम्हारा लेते हैं जो काम हमारा हो जाता है
Shivangi Shivi
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सूरज कस के जलता है पत्थर रोज़ पिघलता है सूख गया दरिया सारा मौसम रोज़ बदलता है
Shivangi Shivi
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सूरज धूप लिए फिरता है रोज़ ज़मीं पर ये गिरता है करने शोर मिरे घावों पे ये बादल मुझ पर घिरता है
Shivangi Shivi
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