sherKuch Alfaaz

आप होने और तुम होने में अंतर होता है दरमियाँ दोनों के इक पूरा समुंदर होता है

More from Aatish Indori

फंदा-वंदा छोड़ कर मैं दूजा सपना बुन रहा हूँ ख़ुद-कुशी तुझ को नहीं मैं ज़िंदगी को चुन रहा हूँ जान-ए-जानाँ जा रहा हूँ मैं मोहब्बत के शिखर पर आशिक़ी को छोड़ कर मैं बंदगी को चुन रहा हूँ

Aatish Indori

0 likes

माना कि धागे पक्के हैं कच्चे नहीं कॉलेज के रिश्ते मगर टिकते नहीं ख़ूब-अच्छे से ये बात सुन ले हर कोई हम मुफ़्त मिल सकते हैं पर सस्ते नहीं

Aatish Indori

0 likes

यूँँ तो कोठियाँ हैं यहाँ बहुत मुझे फिर भी लोग मिले नहीं मैं समझ गया भले देर से बड़े शहर दिल के बड़े नहीं वो हमारे गाँव में आते थे बड़े शहर वाले वो लोग थे कभी फ़ोन उन का लगा नहीं कभी वो पते पे मिले नहीं

Aatish Indori

1 likes

थोड़े-मोड़े थोड़ी हम तो बेहद अजीब थे रस्ते तब बदले जब हम मंज़िल के क़रीब थे किस पर मढ़ते दोष अपनी बर्बादी का 'आतिश' दूजा कोई न था हम ख़ुद ही अपने रक़ीब थे

Aatish Indori

1 likes

माँग कर पैसे ख़फ़ा मैं ने किया दोस्तों को बे-वफ़ा मैं ने किया

Aatish Indori

1 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Aatish Indori.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Aatish Indori's sher.