आप होने और तुम होने में अंतर होता है दरमियाँ दोनों के इक पूरा समुंदर होता है
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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फंदा-वंदा छोड़ कर मैं दूजा सपना बुन रहा हूँ ख़ुद-कुशी तुझ को नहीं मैं ज़िंदगी को चुन रहा हूँ जान-ए-जानाँ जा रहा हूँ मैं मोहब्बत के शिखर पर आशिक़ी को छोड़ कर मैं बंदगी को चुन रहा हूँ
Aatish Indori
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माना कि धागे पक्के हैं कच्चे नहीं कॉलेज के रिश्ते मगर टिकते नहीं ख़ूब-अच्छे से ये बात सुन ले हर कोई हम मुफ़्त मिल सकते हैं पर सस्ते नहीं
Aatish Indori
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यूँँ तो कोठियाँ हैं यहाँ बहुत मुझे फिर भी लोग मिले नहीं मैं समझ गया भले देर से बड़े शहर दिल के बड़े नहीं वो हमारे गाँव में आते थे बड़े शहर वाले वो लोग थे कभी फ़ोन उन का लगा नहीं कभी वो पते पे मिले नहीं
Aatish Indori
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थोड़े-मोड़े थोड़ी हम तो बेहद अजीब थे रस्ते तब बदले जब हम मंज़िल के क़रीब थे किस पर मढ़ते दोष अपनी बर्बादी का 'आतिश' दूजा कोई न था हम ख़ुद ही अपने रक़ीब थे
Aatish Indori
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माँग कर पैसे ख़फ़ा मैं ने किया दोस्तों को बे-वफ़ा मैं ने किया
Aatish Indori
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