आप के साथ रहा जो भी रहा लुत्फ़ ए हयात आप के बा'द तो मुश्किल से गुज़ारी ही गई
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
Tehzeeb Hafi
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और फिर एक दिन बैठे बैठे मुझे अपनी दुनिया बुरी लग गई जिस को आबाद करते हुए मेरे मां-बाप की ज़िंदगी लग गई
Tehzeeb Hafi
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ये मान लिया मैं ने बदला हूँ बहुत लेकिन ये ठीक है क्या पहले जैसी ही रही हो तुम
Prashant Sitapuri
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उस का कहना था साथ रहना है उस की बातों पे ख़ूब हँसता हूँ
Prashant Sitapuri
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याँ जब भी गुलाबों को मैं हाथ लगाता हूँ क्या जान मिरी वाँ तेरे होंठ लरज़ते हैं
Prashant Sitapuri
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तन्हाई में महफिल होता हूँ पर भीड़ अकेला कर देती है
Prashant Sitapuri
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हर बात पे हँसना तो पागल की निशानी है हम लोग भी पागल हैं हर बात पे हँसते हैं
Prashant Sitapuri
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