आप लोगों की दु'आओं का हुआ कुछ यूँँ असर आँधियों ने भी मुजस्सम नूर कर डाला मुझे
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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हाल न पूछो मोहन का सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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तड़प मेरे कलेजे की समझ भी जाओ जान-ए-जाँ ज़ियादा और खुल कर क्या कहूँ बस घर चले आते
Nityanand Vajpayee
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फ़ज़ा में इक नई रंगत है बे-ईमान है मौसम भले कुछ देर ही रुकते मगर दिलबर चले आते
Nityanand Vajpayee
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जो मेरी कामयाबी रोक पाने के नहीं क़ाबिल मेरी बदनामियों से उन को दिल बहलाने दो ख़ुद का
Nityanand Vajpayee
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यहाँ फेंका वहाँ फेंका वहाँ से फिर कहीं फेंका मुझे डर है कहीं मैं और भी ज़्यादा न उग जाऊँ
Nityanand Vajpayee
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रहे हो आप काँटों में महीनों तक मेरे दिलबर बस इक शब होने को सोचा था हम-बिस्तर चले आते
Nityanand Vajpayee
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