तड़प मेरे कलेजे की समझ भी जाओ जान-ए-जाँ ज़ियादा और खुल कर क्या कहूँ बस घर चले आते
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न करो बहस हार जाओगी हुस्न इतनी बड़ी दलील नहीं
Jaun Elia
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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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जो मेरी कामयाबी रोक पाने के नहीं क़ाबिल मेरी बदनामियों से उन को दिल बहलाने दो ख़ुद का
Nityanand Vajpayee
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यहीं खड़े हैं जहाँ मिले थे इधर से कब हम उधर गए हैं
Nityanand Vajpayee
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रोना धोना ये तो केवल एक कहानी होती है अव्वल तो मैं ने अश्कों से प्यास बुझानी होती है
Nityanand Vajpayee
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ख़ुदा-रा कौन सा ग़म टूट पड़ता गर चले आते बिला-शक आस्तीं में तुम लिए नश्तर चले आते
Nityanand Vajpayee
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फ़ज़ा में इक नई रंगत है बे-ईमान है मौसम भले कुछ देर ही रुकते मगर दिलबर चले आते
Nityanand Vajpayee
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