ख़ुदा-रा कौन सा ग़म टूट पड़ता गर चले आते बिला-शक आस्तीं में तुम लिए नश्तर चले आते
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मंज़िलों का कौन जाने रहगुज़र अच्छी नहीं उस की आँखें ख़ूब-सूरत है नज़र अच्छी नहीं
Abrar Kashif
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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दोस्ती लफ़्ज़ ही में दो है दो सिर्फ़ तेरी नहीं चलेगी दोस्त
Zubair Ali Tabish
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झूठ है सब, ज़हीन धोका है इस नज़र का यक़ीन धोका है टूट जाएगा दिल तो समझोगे ये मुहब्बत हसीन धोका है
Sandeep Thakur
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तड़प मेरे कलेजे की समझ भी जाओ जान-ए-जाँ ज़ियादा और खुल कर क्या कहूँ बस घर चले आते
Nityanand Vajpayee
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इज़्ज़त शोहरत शान-ओ-शौक़त सब है मेहनत की रहमत ग़फ़लत से अव्वल इंसाँ को बर्बादी ही मिलती है
Nityanand Vajpayee
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ज़रा सी कामयाबी पर ग़ुरूर उन को है इतना क्यूँ ये दुनिया ख़्वाब है फिर ख़्वाब की औक़ात ही क्या है
Nityanand Vajpayee
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ज़बाँ से ख़ुद ही ख़ुद का व्याखयान मत करना करेंगे काम तेरे तू बयान मत करना कमा सके तो शान-ओ-शौक़ पालना प्यारे उधार माँग माँग कर के शान मत करना
Nityanand Vajpayee
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वो इंसाॅं कैसे हो सकता जिसे इंसाॅं से नफ़रत है वो मज़हब क्या न जिस में बाइस-ए-अम्न-ओ-मोहब्बत है कहाँ जन्नत मिलेगी उन को जो हैं अम्न के क़ातिल ये मासूमों पे हैबत किस पयम्बर वाली उम्मत है
Nityanand Vajpayee
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