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ख़ुदा-रा कौन सा ग़म टूट पड़ता गर चले आते बिला-शक आस्तीं में तुम लिए नश्तर चले आते

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तड़प मेरे कलेजे की समझ भी जाओ जान-ए-जाँ ज़ियादा और खुल कर क्या कहूँ बस घर चले आते

Nityanand Vajpayee

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इज़्ज़त शोहरत शान-ओ-शौक़त सब है मेहनत की रहमत ग़फ़लत से अव्वल इंसाँ को बर्बादी ही मिलती है

Nityanand Vajpayee

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ज़रा सी कामयाबी पर ग़ुरूर उन को है इतना क्यूँ ये दुनिया ख़्वाब है फिर ख़्वाब की औक़ात ही क्या है

Nityanand Vajpayee

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ज़बाँ से ख़ुद ही ख़ुद का व्याखयान मत करना करेंगे काम तेरे तू बयान मत करना कमा सके तो शान-ओ-शौक़ पालना प्यारे उधार माँग माँग कर के शान मत करना

Nityanand Vajpayee

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वो इंसाॅं कैसे हो सकता जिसे इंसाॅं से नफ़रत है वो मज़हब क्या न जिस में बाइस-ए-अम्न-ओ-मोहब्बत है कहाँ जन्नत मिलेगी उन को जो हैं अम्न के क़ातिल ये मासूमों पे हैबत किस पयम्बर वाली उम्मत है

Nityanand Vajpayee

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