आप मेरी ग़ज़ल सुनने आए हैं ना आइए बैठिए तालियाँ दीजिए
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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मेरी दुनिया उजड़ गई इस में तुम इसे हादसा समझते हो आख़िरी रास्ता तो बाक़ी है आख़िरी रास्ता समझते हो
Himanshi babra KATIB
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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कैसा दिल और इस के क्या ग़म जी यूँँ ही बातें बनाते हैं हम जी
Jaun Elia
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याद-दिलबर और मिसरे वक़्त के मोहताज तो नइं हम सुख़न-वर और आशिक़, इस घड़ी का क्या करेंगे
RAAHI
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वार कोई मेरे पीछे से न कर दे डर यही तो ईद से लगता हमेशा
RAAHI
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रात भर जागना सही नइँ है मौत अबकी तू ही सुला मुझ को
RAAHI
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कौन बर्बाद है मेरे जैसा, दर्द भी ग़म-गुसार से ही मिले
RAAHI
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सुब्ह की ये सिलवटें खिलने कहाँ देती मुझे वो सिमट के बॉंह में, हिलने कहाँ देती मुझे
RAAHI
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