आपसे राबता था पहले कोई ओह, हाँ, याद आया, कैसे हो
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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हर एक चीज़ वहीं है जहाँ पे छोड़ी थी बस एक घर ही नहीं आ रहा नज़र घर में
Armaan khan
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हमारी अपनी मर्ज़ी है हमारी अपनी दुनिया है तुम्हारे रंग में ढल जाऊँगा सोचा ही क्यूँ तुम ने
Armaan khan
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तेरी क़िस्मत कहाँ-कहाँ, और मैं एक वीरान सा मकाँ और मैं दूर तक आ रहा नज़र कुछ तो एक सिगरेट का धुआँ और मैं
Armaan khan
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उस ने ज़बाँ से कह तो दिया अलविदा मगर बस एक बार आँख भी कह दे तो और बात
Armaan khan
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यार कश्ती है बहुत दूर, किनारा है कोई डूबने वाले को तिनके का सहारा है कोई अजनबियत के मकड़जाल में उलझे हुए हम ख़ुदस ही पूछ रहे हैं कि तुम्हारा है कोई
Armaan khan
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