यार कश्ती है बहुत दूर, किनारा है कोई डूबने वाले को तिनके का सहारा है कोई अजनबियत के मकड़जाल में उलझे हुए हम ख़ुदस ही पूछ रहे हैं कि तुम्हारा है कोई
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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उस ने ज़बाँ से कह तो दिया अलविदा मगर बस एक बार आँख भी कह दे तो और बात
Armaan khan
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तेरी क़िस्मत कहाँ-कहाँ, और मैं एक वीरान सा मकाँ और मैं दूर तक आ रहा नज़र कुछ तो एक सिगरेट का धुआँ और मैं
Armaan khan
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हर एक चीज़ वहीं है जहाँ पे छोड़ी थी बस एक घर ही नहीं आ रहा नज़र घर में
Armaan khan
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ऐ दिल-ए-हक़ शनास दुनिया है न लगा इस सेे आस, दुनिया है रूह को है तेरी ख़ुदा की तलब और तेरे आस पास दुनिया है
Armaan khan
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आपसे राबता था पहले कोई ओह, हाँ, याद आया, कैसे हो
Armaan khan
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