तेरी क़िस्मत कहाँ-कहाँ, और मैं एक वीरान सा मकाँ और मैं दूर तक आ रहा नज़र कुछ तो एक सिगरेट का धुआँ और मैं
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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उस ने ज़बाँ से कह तो दिया अलविदा मगर बस एक बार आँख भी कह दे तो और बात
Armaan khan
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बाहर अक्सर शोर-शराबा रहता है अंदर इक ख़ामोशी पलती रहती है हम से इक अंदाज़ नहीं बदला जाता दुनिया कैसे रंग बदलती रहती है
Armaan khan
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हमारी अपनी मर्ज़ी है हमारी अपनी दुनिया है तुम्हारे रंग में ढल जाऊँगा सोचा ही क्यूँ तुम ने
Armaan khan
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उस को जो मेरे प्यार पे विश्वास नहीं है ख़ुद मुझ को मेरे प्यार पे शक होने लगा है
Armaan khan
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इश्क़ का अपना भी में'आर हुआ करता है और अब उस सेे मैं नीचे तो नहीं आऊँगा तुझे कुछ कहना है मुझ सेे तो यहीं पर कह दे मैं वो आशिक़ हूँ जो पीछे तो नहीं आऊँगा।
Armaan khan
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