बाहर अक्सर शोर-शराबा रहता है अंदर इक ख़ामोशी पलती रहती है हम से इक अंदाज़ नहीं बदला जाता दुनिया कैसे रंग बदलती रहती है
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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
Tehzeeb Hafi
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मेरे अंदर से आ जाओ बाहर गहमा-गहमी है एक बदन में दो लोगों को कैसे घर ले जाऊँगा
nakul kumar
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लौट कर नहीं आता कब्र से कोई लेकिन प्यार करने वालों को इंतिज़ार रहता है
Shabeena Adeeb
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हम भी गाँव में शाम को बैठा करते थे हम को भी हालात ने बाहर भेजा है
Zahid Bashir
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यही अंजाम अक्सर हम ने देखा है मोहब्बत का कहीं राधा तरसती है कहीं कान्हा तरसता है
Virendra Khare Akela
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हमारी अपनी मर्ज़ी है हमारी अपनी दुनिया है तुम्हारे रंग में ढल जाऊँगा सोचा ही क्यूँ तुम ने
Armaan khan
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तेरी क़िस्मत कहाँ-कहाँ, और मैं एक वीरान सा मकाँ और मैं दूर तक आ रहा नज़र कुछ तो एक सिगरेट का धुआँ और मैं
Armaan khan
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ऐ दिल-ए-हक़ शनास दुनिया है न लगा इस सेे आस, दुनिया है रूह को है तेरी ख़ुदा की तलब और तेरे आस पास दुनिया है
Armaan khan
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उस ने ज़बाँ से कह तो दिया अलविदा मगर बस एक बार आँख भी कह दे तो और बात
Armaan khan
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ये फ़ासला ज़रूर है मगर ये फ़ैसला नहीं सो बेबसी में कह रहा हूँ मैं कोई गिला नहीं मैं देर रात कमरे में ये सोच कर के आया हूँ अब इस के बा'द और कोई रास्ता बचा नहीं
Armaan khan
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