आरज़ू थी ये, कोई लगा ले गले अब मगर सब की बाँहों से डर लगता है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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याद है जब कहा करती थी माँ घर आ तेरी मरम्मत करूँँगी
Sahil Verma
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तुम दर्द को भुला दो आँसू चुरा लो उस के शरमाए लाख वो पर तुम तो गले लगाओ
Sahil Verma
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फूल से काँटे कोई तो चुनना चाहे कोई हो जो मेरी बातें सुनना चाहे मैं ख़यालों में ही जिस के खो चुका हूँ काश वो भी ख़्वाब मेरे बुनना चाहे
Sahil Verma
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याद बनकर लिखा होता दिल पे जो भी एक आँसू वो सब कुछ मिटा आता है
Sahil Verma
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शरारत करती है वो जिस तरह से मुझे अब उस से उलफ़त हो रही है भले अनजान है वो इस से लेकिन उसे भी मेरी चाहत हो रही है
Sahil Verma
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