शरारत करती है वो जिस तरह से मुझे अब उस से उलफ़त हो रही है भले अनजान है वो इस से लेकिन उसे भी मेरी चाहत हो रही है
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मैं चाहता था मुझ सेे बिछड़ कर वो ख़ुश रहे लेकिन वो ख़ुश हुआ तो बड़ा दुख हुआ मुझे
Umair Najmi
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दूर ना जाए कभी तू मुझ सेे साहिल मैं यही भगवान से मिन्नत करूँँगी
Sahil Verma
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ये ग़ज़ल ग़ैर मुसलसल है पर इस में मतला है न ही मक़्ता है
Sahil Verma
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बस याद रख कर के मिरा शिकवा गिला तुम ने दिया है यारी का अच्छा सिला
Sahil Verma
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बुझेगी कभी तो मेरी प्यास लगी है मुझे अब यही आस हो जाए मेरी काश वो ही जिसे चाहता हूँ जो है ख़ास
Sahil Verma
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ठंडी हवा की सोहबत में हो रही बारिश है लगता है ये सर्दी की कोई नई साज़िश है
Sahil Verma
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