आशिक़ चोरी छुपके पहनाते है पायल अपनी महबूबा को जान-ए-जानाँ तुझे सर-ए-आम ख़ानदानी कंगन पहनाने हैं
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बात ही कब किसी की मानी है अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी ये कलाई ये जिस्म और ये कमर तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
Jaun Elia
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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रंग की अपनी बात है वर्ना आख़िरश ख़ून भी तो पानी है
Jaun Elia
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और फिर एक दिन बैठे बैठे मुझे अपनी दुनिया बुरी लग गई जिस को आबाद करते हुए मेरे मां-बाप की ज़िंदगी लग गई
Tehzeeb Hafi
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यारो मुझ को उस हर इक आँख में खटकना है जिस ने मेरे बाप को देख के नज़रें फेरी थी
Saurabh Chauhan 'Kohinoor'
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उस रस्ते को ही छोड़ आया मैं तो फिर से रस्ते में आ गई मुहब्बत
Saurabh Chauhan 'Kohinoor'
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मेरी छोटी सी दुनिया की रानी थी वो इन लबों पर सजी इक कहानी थी वो मैं ने सोचा था ये दोस्ती थी वो बस क्या पता था कि मेरी दिवानी थी वो
Saurabh Chauhan 'Kohinoor'
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नन्ही कोमल कलियाँ जब भी सँवारी जाएँगी बेटा बनकर इक दिन सब के ख़्वाब सजाएँगी चार किताबें पढ़ने दो हर घर की बेटी को कोख से बच आई हैं दहेज से भी बच जाऍंगी
Saurabh Chauhan 'Kohinoor'
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मैं बातों से छोटा बच्चा लगता हूँ हाँ थोड़ा सा राह से भटका लगता हूँ हँसती हुई वो कितनी प्यारी लगती है मैं रोते हुए कितना अच्छा लगता हूँ
Saurabh Chauhan 'Kohinoor'
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