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नन्ही कोमल कलियाँ जब भी सँवारी जाएँगी बेटा बनकर इक दिन सब के ख़्वाब सजाएँगी चार किताबें पढ़ने दो हर घर की बेटी को कोख से बच आई हैं दहेज से भी बच जाऍंगी

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उस रस्ते को ही छोड़ आया मैं तो फिर से रस्ते में आ गई मुहब्बत

Saurabh Chauhan 'Kohinoor'

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तिरी ख़ुशी के ख़ातिर जो लड़का मर मिटता हो मंदिर मस्जिद हर इक चौखट चौखट फिरता हो वो लड़का क्या लड़की की आबरू से खेलेगा जो पहली औलाद की ख़्वाहिश बेटी रखता हो

Saurabh Chauhan 'Kohinoor'

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कुछ लोगों की सोच में भी जाले होते हैं उन लोगों के तो दिल भी काले होते हैं अक्सर मुझ को साँप वही डसते हैं आ कर जो मैं ने आस्तीन में पाले होते हैं

Saurabh Chauhan 'Kohinoor'

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तेरी तस्वीर जब वो दिखाने लगे हम भी धीरे से फिर मुस्कुराने लगे होश खो ही दिया देख कर के तुझे एक लम्हे में हम यूँँ ठिकाने लगे

Saurabh Chauhan 'Kohinoor'

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समेटती है मिरे बिखरने पर मुझ को मेरी ताक़त मेरी हिम्मत वो लड़की

Saurabh Chauhan 'Kohinoor'

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