बाग़बाँ कलियाँ हों हल्के रंग की भेजनी हैं एक कम-सिन के लिए
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नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है कुछ दिन शहर में घू में लेकिन अब घर अच्छा लगता है
Nida Fazli
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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मैं भी कर सकता हूँ पूरी बारिशों की हर कमी छोड़ कर होंठों पे तेरे अपने होंठों की नमी
nakul kumar
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रंग-ओ-रस की हवस और बस मसअला दस्तरस और बस यूँँ बुनी हैं रगें जिस्म की एक नस टस से मस और बस
Ammar Iqbal
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तेरे होंठो से गर इक काम लेना हो तेरे होंठो से हम बस इक दुआ लेंगे
Siddharth Saaz
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अभी आए अभी जाते हो जल्दी क्या है दम ले लो न छेड़ूँगा मैं जैसी चाहे तुम मुझ से क़सम ले लो
Ameer Minai
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शब-ए-विसाल बहुत कम है आसमाँ से कहो कि जोड़ दे कोई टुकड़ा शब-ए-जुदाई का
Ameer Minai
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पुतलियाँ तक भी तो फिर जाती हैं देखो दम-ए-नज़अ वक़्त पड़ता है तो सब आँख चुरा जाते हैं
Ameer Minai
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कौन सी जा है जहाँ जल्वा-ए-माशूक़ नहीं शौक़-ए-दीदार अगर है तो नज़र पैदा कर
Ameer Minai
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आँखें दिखलाते हो जोबन तो दिखाओ साहब वो अलग बाँध के रक्खा है जो माल अच्छा है
Ameer Minai
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