आशिक़ हो चोट खाए हुए तुम तो फिर सुनो 'ग़ालिब' की शा'इरी किसी मरहम से कम नहीं
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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ज़िंदगी भी आख़िरश तंहाई है मैं भला तन्हाई से क्यूँ डर गया
Ajeetendra Aazi Tamaam
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तुम्हारे शहर में आ कर ठिकाना ढूँढ़ते हैं हम अपने शहर में होते तो घर गए होते
Ajeetendra Aazi Tamaam
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वो जो दर्द ए दिल का सुकून था वो ही चारा-गर न मिला हमें न तो ग़म है अब न मलाल है न ख़फ़ा है दिल न गिला हमें
Ajeetendra Aazi Tamaam
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कहते हैं सामिईन उसे जाम-ए-जम-ए-हुस्न वो जाम बिन पिए ही जो बहकाए आप को
Ajeetendra Aazi Tamaam
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रहते हैं अपने आप से कुछ बे-ख़बर से हम जब से हुए हैं रू-ब-रू दर्द-ए-जिगर से हम
Ajeetendra Aazi Tamaam
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