आता है हक़ीक़त पे तसव्वुर मुझे लेकिन आया न यक़ीं मुझ को के देखे है तिरी याद बैठा हूँ अगर जब भी किसी रोड़ किनारे आँखों से मिरी धूल से झलके है तिरी याद
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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ज़िंदगी मुझ को तिरी अब तो ज़रूरत ही नहीं उस की तस्वीर ही जीने के लिए काफ़ी है
salman khan "samar"
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यूँँ टुकड़ों में दहलीज़ बना लेने से घर की दीवारें रौनक़ खो बैठी है
salman khan "samar"
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याद ग़ालिब ने किया है हम को अपने शहर में तो लाज़मी है हम सभी पर इल्म कुछ हासिल करेंगे
salman khan "samar"
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तू हक़ीक़त तू फ़साना दिल मिरा तेरा दिवाना
salman khan "samar"
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तस्वीरें धुँधली हो जाने से यादें थोड़ी धुँधली होती हैं
salman khan "samar"
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