आती है उस तरफ़ से फूलों की ख़ुशबू हर दम मुमकिन है उस का घर भी होगा वहीं-कहीं पे
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मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यूँँ रात भर नहीं आती
Mirza Ghalib
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मैं अपने दोनों तरफ़ एक सा हूँ तेरे लिए किसी से शर्त लगा फिर मुझे उछाल के देख
Abrar Kashif
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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ये तेरे ख़त ये तेरी ख़ुशबू ये तेरे ख़्वाब-ओ-ख़याल मता-ए-जाँ हैं तेरे कौल और क़सम की तरह गुज़िश्ता साल मैं ने इन्हें गिनकर रक्खा था किसी ग़रीब की जोड़ी हुई रक़म की तरह
Jaun Elia
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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ज़रा सा ख़यालों में क्या खो गए हम ख़यालों ने हम को हक़ीक़त दिखा दी
Rachit Sonkar
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तुम मुझे याद अब नहीं आते अब मुझे याद हो गए हो तुम
Rachit Sonkar
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मुझ पर बिछा रही है अपने बदन की चादर मेरे बदन को उस ने बिस्तर बना दिया है
Rachit Sonkar
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उस को गले लगाया उस का बदन भी चूमा कल रात उस के घर की बत्ती चली गई थी
Rachit Sonkar
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हम को तुम्हारी बातें अच्छी नहीं लगी हैं आगे से हम सेे थोड़ा इज़्ज़त से बात करना
Rachit Sonkar
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