अब छोड़ कर तन्हा मुझे मसरूफ़ है वो भी कहीं उस के लिए भी मैं फ़क़त तदबीर था तन्हाई का
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आज देखा है तुझ को देर के बा'द आज का दिन गुज़र न जाए कहीं
Nasir Kazmi
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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इतना बड़ा संसार है फिर भी मुझे चाहत हुई उस ही की जो मेरा नहीं
Pushkar Tripathi
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ये ज़िन्दगी जब भटका जाती है मुझे तब मौत ही रस्ता दिखाती है मुझे जब ग़म मिरा सोने नहीं देता कभी तेरी ख़ुशी जानाँ सुलाती है मुझे
Pushkar Tripathi
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मेरा ज़रूरी इस लिए था डूबना तिनके की ताकत जानने को मिल गई
Pushkar Tripathi
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पहले ख़यालों को उतारा पन्ने पर मैं ने मगर फिर उस पे स्याही फेंक दी
Pushkar Tripathi
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देख लेते तेरी सूरत पर हमें भी कब ख़यालों से तिरे फ़ुर्सत थी जानाँ
Pushkar Tripathi
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