अब मैं कहने को तो कह दूँ कि नहीं हो तुम पर, एक ये झूठ सहारा है इसे रहने दो
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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या'नी अब उस की मुहब्बत का हलफ़ माँगूँ मैं या'नी अब सुर्ख़ लबों पे मैं सियाही फेंकूँ
anupam shah
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उस ने वा'दा यही किया मुझ से और फिर भी नहीं मिला मुझ से कैसे दूँगा उसे वही धोखा उस का ज़्यादा है तजरबा मुझ से
anupam shah
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ज़रूरी है अगर दीवार होना दरमियाँ अपने तो इस दीवार में तुम एक रौशनदान भी देना
anupam shah
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वही मंज़र मुझे हर बार नज़र आता है आँख मूँदूँ तो मुझे यार नज़र आता है ऐसे तो मौत का मेरी कोई क़ातिल ही नहीं वैसे हर शख़्स गुनहगार नज़र आता है
anupam shah
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हसीं कुछ ख़्वाब आँखों को कभी सस्ते नहीं मिलते कभी मंज़िल नहीं मिलती कभी रस्ते नहीं मिलते
anupam shah
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