अब मिरा दर्द मिरी जान हुआ जाता है ऐ मिरे चारागरो अब मुझे अच्छा न करो
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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अब लगता है ठीक कहा था 'ग़ालिब' ने बढ़ते बढ़ते दर्द दवा हो जाता है
Madan Mohan Danish
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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मसअला ये नहीं कि इश्क़ हुआ है हम को मसअला ये है कि इज़हार किया जाना है
Rajesh Reddy
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वाक़िआ' कुछ भी हो सच कहने में रुस्वाई है क्यूँँ न ख़ामोश रहूँ अहल-ए-नज़र कहलाऊँ
Shahzad Ahmad
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मुमकिन हो आप से तो भुला दीजिए मुझे पत्थर पे हूँ लकीर मिटा दीजिए मुझे
Shahzad Ahmad
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तुझ में कस-बल है तो दुनिया को बहा कर ले जा चाय की प्याली में तूफ़ान उठाता क्या है
Shahzad Ahmad
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ये समझ के माना है सच तुम्हारी बातों को इतने ख़ूब-सूरत लब झूट कैसे बोलेंगे
Shahzad Ahmad
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जलते हैं इक चराग़ की लौ से कई चराग़ दुनिया तिरे ख़याल से रौशन हुई तो है
Shahzad Ahmad
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