अब तो मेरे सारे सावन बीत गए बिन मौसम अब बादल बरसे उस सेे क्या
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे
Ahmad Faraz
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तुम्हारे बिन गुज़ारी रात के बस दो ही क़िस्से हैं कभी हिचकी नहीं रुकती कभी सिसकी नहीं रुकती
Ankita Singh
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काग़ज़ की नाव बनाते थे और उस पर भी इतराते थे अब तो छुट्टी भर है बस तब दीवाली यार मनाते थे
Shobhit Dixit
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तेरी ही यादों में पाकीज़ा होना पड़ता है उस के ख़ातिर भी इन आँखों को रोना पड़ता है तुम को तो बस मेरे ख़्वाबों में आना होता है ये सोचो मुझ को तो रातों में सोना पड़ता है
Shobhit Dixit
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साँप को अपना बनाया जा रहा है आस्तीनों में बसाया जा रहा है
Shobhit Dixit
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तजरबा जितना बढ़ने लगता है आईना शक्लें पढ़ने लगता है
Shobhit Dixit
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जिन हाथों से हो कश्मीर बनाते तुम काश उसी से हर तक़दीर बनाते तुम
Shobhit Dixit
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