अब्बू ने भी बतलाया था ये दुनिया ज़ालिम है कहना उन का गर माना होता तो अच्छा होता
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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तू भी कब मेरे मुताबिक मुझे दुख दे पाया किस ने भरना था ये पैमाना अगर ख़ाली था एक दुख ये कि तू मिलने नहीं आया मुझ सेे एक दुख ये है उस दिन मेरा घर ख़ाली था
Tehzeeb Hafi
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ये बहस छोड़ कि कितनी हसीन है दुनिया तू ये बता कि तेरा दिल कहीं लगा कि नहीं
Vijay Sharma
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याद नहीं क्या तुम को मेरे रोने पर रोती थी तुम भी क्या अब तुम को मेरे रोने पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता
Kabir Altamash
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मेरे अब्बू सच कहते थे बेटा इक दिन पछताओगे
Kabir Altamash
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किसी को भेज मेरे पास मेरे रब कि तू तो जानता है ना मैं तन्हा हूँ
Kabir Altamash
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दोस्त तुम ने ये कभी सोचा है बोलो मैं नहीं होता तो क्या होता तुम्हारा
Kabir Altamash
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उठेंगे हम नहीं सजदे से तब तलक या रब ये सारे मस'अले जब तक के हल नहीं होंगे
Kabir Altamash
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