अगर रक़ीब न होते तो दोस्त होते आप हमारे शौक़, ख़यालात एक जैसे हैं
sherKuch Alfaaz
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मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा
Allama Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे
Ahmad Faraz
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हम किसी को राह में कुछ देर भी तक लें अगर पागलों को जो मिले तो सब के सब पागल मिले
nakul kumar
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जब मुंडेरों से धूप ढलती है तो कमी उस की मुझ को खलती है जो हथेली पे अपनी लिखती थी दोस्ती प्यार में बदलती है
Sandeep Thakur
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