apne jine ke hum asbab dikhate hain tumhein dosto aao ki kuchh khwab dikhate hain tumhein
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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कौन सा जुर्म ख़ुदा जाने हुआ है साबित मशवरे करता है मुंसिफ़ जो गुनहगार के साथ
Saleem Siddiqui
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जब से सीखा है हुनर शीशागरी का मैं ने बस उसी दिन से ये दुनिया है कि पत्थर हुई है
Saleem Siddiqui
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एक बच्ची से ख़रीदे थे ये गजरे हम ने लौट कर हम किसी मुजरे से नहीं आए हैं
Saleem Siddiqui
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उम्र भर जिस के लिए पेट से बाँधे पत्थर अब वो गिन गिन के खिलाता है निवाले मुझ को
Saleem Siddiqui
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हम को उड़ने के तरीक़े न सिखाओ हम लोग पेड़ से आए हैं पिंजरे से नहीं आए हैं
Saleem Siddiqui
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