अस्ल क़ातिल तो सामने है मगर तुम को इल्ज़ाम मुझ पे धरना है
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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तुम मोहब्बत को खेल कहते हो हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
Bashir Badr
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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मैं कैसे हार मानूँ बिन लड़े ग़ुरबत के सहरा से अभी तो ग़म भुलाने हैं ख़ुशी का बीज बोना है
Amaan Pathan
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तुम्हें उस्ताद से मिलेगा जो न मिलेगा ग़ज़ल की बाबत में
Amaan Pathan
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काठ की हाँडी अब न चढ़ेगी ज़ुल्म के चूल्हे पर यारो वक़्त का पहिया घूमेगा मुंसिफ़ भी जेल में जाएगा
Amaan Pathan
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पहले-पहल तो लड़ लिए अल्लाह से मगर अब पेश आ रहे हैं बड़ी आजिज़ी से हम
Amaan Pathan
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जो भी मिला वो रख लिया हम ने सहेज कर अब और क्या ही माँगते इस आशिक़ी से हम
Amaan Pathan
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