और कुछ दिन यहाँ रहूँगा मैं पर रहेगा यहीं हमेशा दिल
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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लोग सब सोच कर अगर बोलें तो हमेशा ही मुख़्तसर बोलें
Taufique Habib
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क्यूँ हिमायत में किसी की हम फोड़ दें आँखें किसी की हम
Taufique Habib
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दीवार दरिया या कहीं सहरा ना हो मुमकिन नहीं के प्यार पे पहरा ना हो जब दूर थे ये दर्द-ए-दिल पैदा हुआ नजदीकियों से फिर ये क्यूँँ गहरा ना हो
Taufique Habib
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क्यूँ हिमायत में किसी की हम फोड़ दें आँखें किसी की हम है मुयस्सर अक़्ल तो फिर क्यूँ बातों में आएँ किसी की हम
Taufique Habib
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थी उसी काम की तलब अब तक पर वही काम अब नहीं होगा
Taufique Habib
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