और फिर तय ये हुआ चेहरा नहीं देखेंगे जाने वालों का कभी रस्ता नहीं देखेंगे आज चढ़ जा तू ये ऊँचाई कि अब मंज़िल पर कल भला लोग तुझे बढ़ता नहीं देखेंगे
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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ज़िंदगी जिस दिन मिरी तू जान लेता बात मेरी तू उसी दिन मान लेता डूबते आख़िर नहीं वो सब हमारे तब अगर गहराई मेरी जान लेता
Shivam Raahi Badayuni
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उम्मीद नहीं कोई हमें याद करोगे ऐसा है मिरा ज़ख़्म के बर्बाद करोगे है बात ख़मोशी की उदासी की हमारी क्या आप हमें दर्द से आज़ाद करोगे
Shivam Raahi Badayuni
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उदासी जिस तरह देखी बदन में है उसे कहना कहीं मर ही न जाए हम घुटन में है उसे कहना हमारे लोग जो घर तक बचा पाए नहीं अपना गए मिट आग की ऐसी जलन में है उसे कहना
Shivam Raahi Badayuni
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अब हम कभी तुम को बुलाएँगे नहीं दिल जो दुखा तुम को बताएँगे नहीं
Shivam Raahi Badayuni
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सफ़र रुक गया और चलने के बा'द बचा ही नहीं घर ये जलने के बा'द
Shivam Raahi Badayuni
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