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ज़िंदगी जिस दिन मिरी तू जान लेता बात मेरी तू उसी दिन मान लेता डूबते आख़िर नहीं वो सब हमारे तब अगर गहराई मेरी जान लेता

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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी

Ali Zaryoun

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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा

Bashir Badr

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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो

Tehzeeb Hafi

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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है

Tehzeeb Hafi

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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ

Ali Zaryoun

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उम्मीद नहीं कोई हमें याद करोगे ऐसा है मिरा ज़ख़्म के बर्बाद करोगे है बात ख़मोशी की उदासी की हमारी क्या आप हमें दर्द से आज़ाद करोगे

Shivam Raahi Badayuni

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उदासी जिस तरह देखी बदन में है उसे कहना कहीं मर ही न जाए हम घुटन में है उसे कहना हमारे लोग जो घर तक बचा पाए नहीं अपना गए मिट आग की ऐसी जलन में है उसे कहना

Shivam Raahi Badayuni

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हमें भी मिलने की ख़्वाहिश बहुत है अभी तो शहर में बारिश बहुत है

Shivam Raahi Badayuni

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सफ़र रुक गया और चलने के बा'द बचा ही नहीं घर ये जलने के बा'द

Shivam Raahi Badayuni

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मोहब्बत आपसे करने में अब घबरा रहे हैं हम भला कैसे ये आख़िर दर्द को अपना रहे हैं हम जिसे अब रात दिन ही देखते थे बाहों में अपनी उसी से ख़ैर अब मिलने में क्यूँ शर्मा रहे हैं हम

Shivam Raahi Badayuni

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