हमें भी मिलने की ख़्वाहिश बहुत है अभी तो शहर में बारिश बहुत है
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बहुत मज़ाक़ उड़ाते हो तुम ग़रीबों का मदद तो करते हो तस्वीर खींच लेते हो
Nawaz Deobandi
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है
Zubair Ali Tabish
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हाथ ख़ाली है तेरे शहर से जाते जाते जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ज़िंदगी जिस दिन मिरी तू जान लेता बात मेरी तू उसी दिन मान लेता डूबते आख़िर नहीं वो सब हमारे तब अगर गहराई मेरी जान लेता
Shivam Raahi Badayuni
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उदासी जिस तरह देखी बदन में है उसे कहना कहीं मर ही न जाए हम घुटन में है उसे कहना हमारे लोग जो घर तक बचा पाए नहीं अपना गए मिट आग की ऐसी जलन में है उसे कहना
Shivam Raahi Badayuni
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सफ़र रुक गया और चलने के बा'द बचा ही नहीं घर ये जलने के बा'द
Shivam Raahi Badayuni
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मोहब्बत आपसे करने में अब घबरा रहे हैं हम भला कैसे ये आख़िर दर्द को अपना रहे हैं हम जिसे अब रात दिन ही देखते थे बाहों में अपनी उसी से ख़ैर अब मिलने में क्यूँ शर्मा रहे हैं हम
Shivam Raahi Badayuni
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आप के बुलाने पर और कौन आएगा ज़ख़्म ये दिखाने पर और कौन आएगा जिस तरह मोहब्बत ये लोगों तक में पहुँची है अब के उस निशाने पर और कौन आएगा
Shivam Raahi Badayuni
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