बड़ी ग़मगीन थीं आँखें फ़िराक़-ए-यार में लेकिन ख़्याल-ए-वस्ल से फिर शाम रंगीं हो गई मेरी
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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ज़िन्दगी रुख़ पर जो तेरे छाई है ये ख़ामुशी आ इसे मैं चीर दूँ पाज़ेब की झंकार से
Kiran K
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खिल रहे हैं आजकल जो मेरी पलकों पर नींद उन ख़्वाबों में ही बिखरी पड़ी होगी
Kiran K
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ज़िन्दगी मुस्तक़िल वबाल रही हर घड़ी थी ज़वाल की सूरत
Kiran K
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ग़ज़ल मेरी ये किस ने ज़ख़्म पर बाँधी है अपने मेरे अलफ़ाज़ किस के वास्ते मरहम हुए हैं
Kiran K
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उलझ जाती हूँ अक्सर आईने से मैं तक़ाबुल में जो ख़ुद को देखती हूँ अक्स तेरा ही उभरता है
Kiran K
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