बैठ कर मालूम करना है तुम्हारे साथ मुझ को क्यूँ मैं इतने दिन से अपने आप से बिछड़ा हुआ हूँ
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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तुम्हारी दिल-लगी तुम को मुबारक मुझे तो इश्क़ होता जा रहा है
Satyawesh Niraj
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आख़िरश को नींद प्यारी हो गई आख़िरश हम मौत तक भी आ गए
Satyawesh Niraj
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दिल की दुनिया में कोई आग लगाने आया एक जंगल हुई बस्ती को जलाने आया एक कमज़र्फ़ को भेजा था दुआएँ देकर एक कमज़र्फ़ मुझे फिर से सताने आया
Satyawesh Niraj
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भरोसा यार हाँ हाँ वो भरोसा ही वही तो खो दिया तुम ने भरोसा कर
Satyawesh Niraj
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मैं तुम को याद करता हूँ अब इस में 'था' लगा दें तो
Satyawesh Niraj
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