आख़िरश को नींद प्यारी हो गई आख़िरश हम मौत तक भी आ गए
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दो गज़ सही मगर ये मेरी मिल्कियत तो है ऐ मौत तू ने मुझे ज़मींदार कर दिया
Rahat Indori
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मौत वो है जो आए सजदे में ज़िन्दगी वो जो बंदगी हो जाए क्या कहूँ आप कितने प्यारे हैं इतने प्यारे कि प्यार ही हो जाए
Vikram Gaur Vairagi
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना था वो ख़्वाब में भी मिले मैं नींद नींद को तरसा मगर नहीं सोया ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल था कि थम गई बारिश ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म है कि मैं नहीं रोया
Khalil Ur Rehman Qamar
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यहाँ मौत का ख़ौफ़ कुछ यूँँ है सब को कि जीने की ख़ातिर मरे जा रहे हैं
Sapna Moolchandani
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आई होगी किसी को हिज्र में मौत मुझ को तो नींद भी नहीं आती
Akbar Allahabadi
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तुम्हारी दिल-लगी तुम को मुबारक मुझे तो इश्क़ होता जा रहा है
Satyawesh Niraj
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दिल की दुनिया में कोई आग लगाने आया एक जंगल हुई बस्ती को जलाने आया एक कमज़र्फ़ को भेजा था दुआएँ देकर एक कमज़र्फ़ मुझे फिर से सताने आया
Satyawesh Niraj
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भरोसा यार हाँ हाँ वो भरोसा ही वही तो खो दिया तुम ने भरोसा कर
Satyawesh Niraj
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बैठ कर मालूम करना है तुम्हारे साथ मुझ को क्यूँ मैं इतने दिन से अपने आप से बिछड़ा हुआ हूँ
Satyawesh Niraj
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दूर जाना भूल जाना फिर नए रिश्ते बनाना है नहीं आसान फिर भी मैं यहाँ कोशिश करूँँगा
Satyawesh Niraj
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