'बाक़ी' जो चुप रहोगे तो उट्ठेंगी उँगलियाँ है बोलना भी रस्म-ए-जहाँ बोलते रहो
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मैं ने बस इतना पूछा था क्या देखते हो भला मैं ने ये कब कहा था मुझे देखना छोड़ दो गीली मिट्टी की ख़ुशबू मुझे सोने देती नहीं मेरे बालों में तुम उँगलियाँ फेरना छोड़ दो
Tajdeed Qaiser
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कुछ न कुछ बोलते रहो हम सेे चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
Fahmi Badayuni
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चुप-चाप बैठे रहते हैं कुछ बोलते नहीं बच्चे बिगड़ गए हैं बहुत देख-भाल से
Adil Mansuri
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मेरा ख़याल तेरी चुप्पियों को आता है तेरा ख़याल मेरी हिचकियों को आता है
Kumar Vishwas
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उस की बेचैनी बढ़ाना चाहती हूँ सुनिए कह कर चुप लगाना चाहती हूँ
Pooja Bhatia
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तुम ज़माने की राह से आए वर्ना सीधा था रास्ता दिल का
Baqi Siddiqui
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वक़्त के पास हैं कुछ तस्वीरें कोई डूबा है कि उभरा देखो
Baqi Siddiqui
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तुम भी उल्टी उल्टी बातें पूछते हो हम भी कैसी कैसी क़स में खाते हैं
Baqi Siddiqui
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हर नए हादसे पे हैरानी पहले होती थी अब नहीं होती
Baqi Siddiqui
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