चुप-चाप बैठे रहते हैं कुछ बोलते नहीं बच्चे बिगड़ गए हैं बहुत देख-भाल से
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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तू किस के कमरे में थी मैं तेरे कमरे में था
Adil Mansuri
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ख़ुद-ब-ख़ुद शाख़ लचक जाएगी फल से भरपूर तो हो लेने दो
Adil Mansuri
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मुझे पसंद नहीं ऐसे कारोबार में हूँ ये जब्र है कि मैं ख़ुद अपने इख़्तियार में हूँ
Adil Mansuri
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हम को गाली के लिए भी लब हिला सकते नहीं ग़ैर को बोसा दिया तो मुँह से दिखला कर दिया
Adil Mansuri
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किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप को काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के
Adil Mansuri
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