बे-शक्ल वो सब हाथ थे जो नोचते थे जिस्म को मशहूर चेहरा वो हुआ जिस की गई थी आबरू
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मेरा हाथ पकड़ ले पागल, जंगल है जितना भी रौशन हो जंगल, जंगल है
Umair Najmi
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दर्द-ए-मुहब्बत दर्द-ए-जुदाई दोनों को इक साथ मिला तू भी तन्हा मैं भी तन्हा आ इस बात पे हाथ मिला
Abrar Kashif
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वो मेरे चेहरे तक अपनी नफरतें लाया तो था मैं ने उस के हाथ चू में और बेबस कर दिया
Waseem Barelvi
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मैं चूमता हूँ तो वो हाथ खींच लेता है उसे पता है ये सीढ़ी कहाँ पे जानी है
Nadir Ariz
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रंग-ओ-रस की हवस और बस मसअला दस्तरस और बस यूँँ बुनी हैं रगें जिस्म की एक नस टस से मस और बस
Ammar Iqbal
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ख़ुदा है संग मेरे हाथ था में हर घड़ी जैसे ज़माने पर ज़फ़र होना मुझे आसान लगता है
Rubball
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ज़िंदगी से ज़िंदगी जब रूठ जाएगी सनम ख़्वाब पाने के मुझे तुम देखना फिर सौ जनम रात को हँसते मिलोगे नींद में बेफ़िक्र तुम और उठते ही सवेरे फिर करोगे आँख नम
Rubball
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अपनी ख़ुशबू उस की साॅंसों में भर आई थी आँखों से सीलन उस की चोरी कर लाई थी फ़ुर्क़त में भी मैं कर लेती हूँ बातें उस से मैं उस का चेहरा हाथों में भर कर लाई थी
Rubball
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हाथ अपनों के थे शामिल लूटने में घर मिरा जाँच रो के कर रहे हैं कुछ नहीं रह तो गया
Rubball
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आंचल मिरा ख़ाली रहा बरसात की उम्मीद में वो मुझ से पर्दा कर के क्यूँ शब भर भला रोता रहा
Rubball
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