ज़िंदगी से ज़िंदगी जब रूठ जाएगी सनम ख़्वाब पाने के मुझे तुम देखना फिर सौ जनम रात को हँसते मिलोगे नींद में बेफ़िक्र तुम और उठते ही सवेरे फिर करोगे आँख नम
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ये प्यार तेरी भूल है क़ुबूल है मैं संग हूँ तू फूल है क़ुबूल है तू रूठेगी तो मैं मनाऊँगा नहीं जो रूल है वो रूल है क़ुबूल है
Varun Anand
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कभी जो ख़्वाब था वो पा लिया है मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी
Javed Akhtar
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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
Ahmad Faraz
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हम को हमारी नींद भी वापस नहीं मिली लोगों को उन के ख़्वाब जगा कर दिए गए
Imran Aami
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तू ने देखी है वो पेशानी वो रुख़्सार वो होंठ ज़िंदगी जिन के तसव्वुर में लुटा दी हम ने तुझ पे उठी हैं वो खोई हुई साहिर आँखें तुझ को मालूम है क्यूँ उम्र गँवा दी हम ने
Faiz Ahmad Faiz
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ख़ुदा है संग मेरे हाथ था में हर घड़ी जैसे ज़माने पर ज़फ़र होना मुझे आसान लगता है
Rubball
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बे-शक्ल वो सब हाथ थे जो नोचते थे जिस्म को मशहूर चेहरा वो हुआ जिस की गई थी आबरू
Rubball
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हाथ अपनों के थे शामिल लूटने में घर मिरा जाँच रो के कर रहे हैं कुछ नहीं रह तो गया
Rubball
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अपनी ख़ुशबू उस की साॅंसों में भर आई थी आँखों से सीलन उस की चोरी कर लाई थी फ़ुर्क़त में भी मैं कर लेती हूँ बातें उस से मैं उस का चेहरा हाथों में भर कर लाई थी
Rubball
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आज सारे शोर दिल के ख़्वार हैं चुप-चाप हैं एक मुद्दत बा'द सीने से लगे यूँँ आप हैं
Rubball
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