भाइयों का था दिन आज सो इक बहन दे गई है उदासी के तोहफ़े कई
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रूठा था मैं बहुत दिनों से मान गया लेकिन कान पकड़ कर जब वो बोली सोरी-वोरी सब
Sandeep Thakur
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मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यूँँ रात भर नहीं आती
Mirza Ghalib
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हाल मीठे फलों का मत पूछो रात दिन चाकूओं में रहते हैं
Fahmi Badayuni
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आज देखा है तुझ को देर के बा'द आज का दिन गुज़र न जाए कहीं
Nasir Kazmi
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बे-दिली क्या यूँँही दिन गुज़र जाएँगे सिर्फ़ ज़िंदा रहे हम तो मर जाएँगे
Jaun Elia
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नाज़ तू ने सब उठाए मेरे ख़ातिर काश करता कुछ मैं भी जाँ तेरे ख़ातिर उम्र भर मरता रहा इक बूँद पर मैं और समुंदर भी था प्यासा मेरे ख़ातिर
Brajnabh Pandey
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वो तेरे ख़ातिर जो सपना देखा था 'ब्रज' अब वो कोई और पूरा कर रहा है
Brajnabh Pandey
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मैं ने बस एक बोसा चाहा था उस से वो शख़्स आया मगर मेरी क़ज़ा के बा'द
Brajnabh Pandey
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फिर वही शाम याद आई है आज फिर रात तन्हा गुज़रेगी
Brajnabh Pandey
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मेरे सारे उदासी के धन का मेरे बेटे तू त्याग कर देना
Brajnabh Pandey
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