sherKuch Alfaaz

भरोसा ही नहीं होता हुए मग़रूर बैठे हैं दिलों के पास रहते थे यही जो दूर बैठे हैं किया जो आँख ढक कर के भरोसा देखना इक दिन यही तोड़ें न तेरा दिल बने जो हूर बैठे हैं

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यहाँ से दफ़ा हो कहो उस फ़ुलाँ से शिकायत जिसे है हमारी यहाँ से समझ ही न पाए हमें वो कभी भी बुरा दिल नहीं बस बुरे हैं ज़बाँ से

Inshpa Ilahabadi

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वहाँ कोई इशारा भी नहीं अब जा सकेगा सुन बिना उस के गुज़ारा भी नहीं अब जा सकेगा सुन कि मुझ सेे दूर इतनी जा चुका है अक्स ही मेरा जहाँ उस को पुकारा भी नहीं अब जा सकेगा सुन

Inshpa Ilahabadi

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तुम भी उस की ख़ूब हिफ़ाज़त करते हो ना जान लुटाकर ख़ूब मुहब्बत करते हो ना लड़ जाते हो उस की ख़ातिर दुनिया से भी अपनो से भी यार अदावत करते हो ना

Inshpa Ilahabadi

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आपने अपना हमें माना नहीं कौन हैं हम ये कभी जाना नहीं छोड़ के तुम जा रहे हो तो सुनो लौट कर के फिर कभी आना नहीं

Inshpa Ilahabadi

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पल में बदलते हैं यहाँ पर फ़ैसले जो आज ठोकर है सहारा था कभी

Inshpa Ilahabadi

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