यहाँ से दफ़ा हो कहो उस फ़ुलाँ से शिकायत जिसे है हमारी यहाँ से समझ ही न पाए हमें वो कभी भी बुरा दिल नहीं बस बुरे हैं ज़बाँ से
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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अकेलेपन से कहाँ तालमेल होता है खिलाड़ी इश्क़ में दो हों तो खेल होता है न लेना इश्क़ के पर्चे में सौ से कम नंबर यहाँ निनानवे वाला भी फेल होता है
Rehman Faris
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तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँँ करो 'ग़ालिब' ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं
Mirza Ghalib
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एक आवाज़ कि जो मुझ को बचा लेती है ज़िन्दगी आख़री लम्हों में मना लेती है जिस पे मरती हो उसे मुड़ के नहीं देखती वो और जिसे मारना हो यार बना लेती है
Ali Zaryoun
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हम से यहाँ तो कुछ भी समेटा न जा सका हम से हर एक चीज़ बिखरती चली गई
Ameer Imam
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तुम भी उस की ख़ूब हिफ़ाज़त करते हो ना जान लुटाकर ख़ूब मुहब्बत करते हो ना लड़ जाते हो उस की ख़ातिर दुनिया से भी अपनो से भी यार अदावत करते हो ना
Inshpa Ilahabadi
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वहाँ कोई इशारा भी नहीं अब जा सकेगा सुन बिना उस के गुज़ारा भी नहीं अब जा सकेगा सुन कि मुझ सेे दूर इतनी जा चुका है अक्स ही मेरा जहाँ उस को पुकारा भी नहीं अब जा सकेगा सुन
Inshpa Ilahabadi
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भरोसा ही नहीं होता हुए मग़रूर बैठे हैं दिलों के पास रहते थे यही जो दूर बैठे हैं किया जो आँख ढक कर के भरोसा देखना इक दिन यही तोड़ें न तेरा दिल बने जो हूर बैठे हैं
Inshpa Ilahabadi
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पल में बदलते हैं यहाँ पर फ़ैसले जो आज ठोकर है सहारा था कभी
Inshpa Ilahabadi
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सब को उस का नाम बताने लगते हैं अपने सब अरमान सजाने लगते हैं उस के जैसी होती हैं परियाँ शायद दुनिया को तस्वीर दिखाने लगते हैं
Inshpa Ilahabadi
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