सब को उस का नाम बताने लगते हैं अपने सब अरमान सजाने लगते हैं उस के जैसी होती हैं परियाँ शायद दुनिया को तस्वीर दिखाने लगते हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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यहाँ से दफ़ा हो कहो उस फ़ुलाँ से शिकायत जिसे है हमारी यहाँ से समझ ही न पाए हमें वो कभी भी बुरा दिल नहीं बस बुरे हैं ज़बाँ से
Inshpa Ilahabadi
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तुम भी उस की ख़ूब हिफ़ाज़त करते हो ना जान लुटाकर ख़ूब मुहब्बत करते हो ना लड़ जाते हो उस की ख़ातिर दुनिया से भी अपनो से भी यार अदावत करते हो ना
Inshpa Ilahabadi
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वहाँ कोई इशारा भी नहीं अब जा सकेगा सुन बिना उस के गुज़ारा भी नहीं अब जा सकेगा सुन कि मुझ सेे दूर इतनी जा चुका है अक्स ही मेरा जहाँ उस को पुकारा भी नहीं अब जा सकेगा सुन
Inshpa Ilahabadi
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मेरी ज़बाँ की अब सदा ख़ामोश है तू आ न जा तुझ को पुकारा था कभी
Inshpa Ilahabadi
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पल में बदलते हैं यहाँ पर फ़ैसले जो आज ठोकर है सहारा था कभी
Inshpa Ilahabadi
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