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पल में बदलते हैं यहाँ पर फ़ैसले जो आज ठोकर है सहारा था कभी

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वहाँ कोई इशारा भी नहीं अब जा सकेगा सुन बिना उस के गुज़ारा भी नहीं अब जा सकेगा सुन कि मुझ सेे दूर इतनी जा चुका है अक्स ही मेरा जहाँ उस को पुकारा भी नहीं अब जा सकेगा सुन

Inshpa Ilahabadi

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यहाँ से दफ़ा हो कहो उस फ़ुलाँ से शिकायत जिसे है हमारी यहाँ से समझ ही न पाए हमें वो कभी भी बुरा दिल नहीं बस बुरे हैं ज़बाँ से

Inshpa Ilahabadi

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तुम भी उस की ख़ूब हिफ़ाज़त करते हो ना जान लुटाकर ख़ूब मुहब्बत करते हो ना लड़ जाते हो उस की ख़ातिर दुनिया से भी अपनो से भी यार अदावत करते हो ना

Inshpa Ilahabadi

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सब को उस का नाम बताने लगते हैं अपने सब अरमान सजाने लगते हैं उस के जैसी होती हैं परियाँ शायद दुनिया को तस्वीर दिखाने लगते हैं

Inshpa Ilahabadi

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मेरी ज़बाँ की अब सदा ख़ामोश है तू आ न जा तुझ को पुकारा था कभी

Inshpa Ilahabadi

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