भूल जाने का तुझे कैसे तसव्वुर कर लूँ मेरे हर ख़्वाब की रुठी हुई ता'बीर है तू
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
Umair Najmi
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यूँँ तो गुज़रे हैं बहुत अहले मुहब्बत लेकिन हम से आशुफ़्ता सर् इस शहर से कम गुज़रे हैं
Sultan
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आ जा के बे-क़रारियाँ हद से गुज़र गई अब ज़ख़्म इंतिज़ार का नासूर हो गया
Sultan
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कुछ तू ही मेरे दर्द का मज़मून समझ ले हँसता हुआ चेहरा तो ज़माने के लिए है
Sultan
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मायूसियों के दौर में किन हसरतों के साथ हम पत्थरों के दिल में ख़ुदा ढूँढ़ते रहे
Sultan
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तुम सेे मिले ना थे तो कोई आरज़ू ना थी देखा तुझे तो तेरे तलबगार हो गए
Sultan
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