मायूसियों के दौर में किन हसरतों के साथ हम पत्थरों के दिल में ख़ुदा ढूँढ़ते रहे
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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यूँँ तो गुज़रे हैं बहुत अहले मुहब्बत लेकिन हम से आशुफ़्ता सर् इस शहर से कम गुज़रे हैं
Sultan
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आ जा के बे-क़रारियाँ हद से गुज़र गई अब ज़ख़्म इंतिज़ार का नासूर हो गया
Sultan
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नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है उन की आग़ोश में सर् हो ये ज़रूरी तो नहीं
Sultan
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भूल जाने का तुझे कैसे तसव्वुर कर लूँ मेरे हर ख़्वाब की रुठी हुई ता'बीर है तू
Sultan
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कुछ तू ही मेरे दर्द का मज़मून समझ ले हँसता हुआ चेहरा तो ज़माने के लिए है
Sultan
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