कुछ तू ही मेरे दर्द का मज़मून समझ ले हँसता हुआ चेहरा तो ज़माने के लिए है
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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अब लगता है ठीक कहा था 'ग़ालिब' ने बढ़ते बढ़ते दर्द दवा हो जाता है
Madan Mohan Danish
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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यूँँ तो गुज़रे हैं बहुत अहले मुहब्बत लेकिन हम से आशुफ़्ता सर् इस शहर से कम गुज़रे हैं
Sultan
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मायूसियों के दौर में किन हसरतों के साथ हम पत्थरों के दिल में ख़ुदा ढूँढ़ते रहे
Sultan
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नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है उन की आग़ोश में सर् हो ये ज़रूरी तो नहीं
Sultan
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तुम सेे मिले ना थे तो कोई आरज़ू ना थी देखा तुझे तो तेरे तलबगार हो गए
Sultan
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भूल जाने का तुझे कैसे तसव्वुर कर लूँ मेरे हर ख़्वाब की रुठी हुई ता'बीर है तू
Sultan
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