यूँँ तो गुज़रे हैं बहुत अहले मुहब्बत लेकिन हम से आशुफ़्ता सर् इस शहर से कम गुज़रे हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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मायूसियों के दौर में किन हसरतों के साथ हम पत्थरों के दिल में ख़ुदा ढूँढ़ते रहे
Sultan
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आ जा के बे-क़रारियाँ हद से गुज़र गई अब ज़ख़्म इंतिज़ार का नासूर हो गया
Sultan
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कुछ तू ही मेरे दर्द का मज़मून समझ ले हँसता हुआ चेहरा तो ज़माने के लिए है
Sultan
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तुम सेे मिले ना थे तो कोई आरज़ू ना थी देखा तुझे तो तेरे तलबगार हो गए
Sultan
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नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है उन की आग़ोश में सर् हो ये ज़रूरी तो नहीं
Sultan
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