बीच सड़क इक लाश पड़ी थी और ये लिक्खा था भूक में ज़हरीली रोटी भी मीठी लगती है
sherKuch Alfaaz
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हमीं तलाश के देते हैं रास्ता सब को हमीं को बा'द में रस्ता दिखाया जाता है
Varun Anand
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वक़्त अच्छा भी आएगा 'नासिर' ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी
Nasir Kazmi
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बदन लिए तलाशता फिरू हूँ रात दिन उसे सुना है जान भी मेरी कहीं इसी शहर में है
Bhaskar Shukla
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जंग अपनों के बीच जारी है सबके हाथों में इक कटारी है छत हो दीवार हो कि दरवाज़ा सबकी अपनी ही ज़िम्मेदारी है
Santosh S Singh
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रह भी सकता है कहीं नाम तेरा लिक्खा हुआ सारे जंगल की तो पड़ताल नहीं कर सकते
Nadir Ariz
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